रविवार, 26 अगस्त 2012

मनमोहन की बांसुरी , हम सरकार हैं , भ्रष्टाचारी , छोटन को उत्पात , बड़ों को संरक्षण , आनंद

मनमोहन की बांसुरी 
राजा मनमानी करे, चिदंबरम दे साथ ,
मनमोहन की बांसुरी ,सोनिया जी के हाथ .
सोनिया जी के हाथ नचाएँ सबके पुतले 
जबतक चलता खेल नेता सब मिलकर खेलें.
जनता है हैरान ,देखकर उनकी माया ,
मची लूट पर लूट कहीं कोई समझ न पाया .
      हम सरकार हैं 
सीना तान बढ़ा रहे मंहगाई , भ्रष्टाचार ,
कहते हम सरकार हैं जनता है लाचार .
जनता है लाचार ,वोट जब देने जाते 
जाति - धर्म को देख , बटन दबा कर आते .
नेता हैं चालाक , एक दिन खूब लुटाएं ,
एक बार गए जीत , जन्मों तक मौज मनाएँ.
          भ्रष्टाचारी 
हर भ्रष्टाचारी  चाहता  घूंस न खाए कोय , 
मुझको धन मिलता रहे , उस पर रोक न होय .
उस पर रोक न होय,ऐसा कानून बनाएं ,
दूसरा रुपये खाय , उसे जेल पहुंचाएं .
सबका एक विचार , कि जो ईमान बताएं, 
कर दो उनको दूर , कि टांग साथ ले जाएँ .
 छोटन को उत्पात 
क्षमा बड़न   को चाहिए , छोटन को उत्पात ,
कवि रहीम सिखला गए , नेताओं को यह बात .
 नेताओं को यह बात .,सेवक बने रहो प्रत्यक्ष ,
सारे उत्पात हों माफ़ , लूट खसोट में होगे दक्ष .
नेता -अफसर की जात दिखावटी करती सेवा,
जनता खड़ी निरीह , ये खाते जाते मेवा .
            बड़ों को संरक्षण 
छोटों को भ्रष्ट दिखाएँ ,इस शासन के वीर ,
मगरमच्छों को छोड़ दें ,उधर न चलते तीर .
उधर न चलते तीर, ऊपर से दें संरक्षण ,
छापेमारी के खेल में छोटों को आरक्षण .
एक हो बढाएं   वेतन , करें मिलकर  भ्रष्टाचार 
सुशासन का प्रचार कर रही  यह ढोंगी सरकार .
           आनंद 
घूंस ,गबन या लूट हो ,या चोरी का मॉल 
मॉल-ए- मुफ्त की ख़ुशी की मिलती नहीं मिसाल .
 मिलती नहीं मिसाल आनंद तुम्हें हो लेना , 
करते  रहो  ऐसे काम , सबको दुःख पड़े सहना .
चुगली ईर्ष्या की राह  , सरल सबसे है होती ,
एक बार जो चख ले स्वाद , इच्छा कभी तृप्त न होती .

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