गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

स्पेक्ट्रम घोटाला

स्पेक्ट्रम घोटाला
१.रिलायंस अधिकारी जेल में

बाहर तुम क्या कर रहे , राजा जेल तिहाड़ ,
बाँट रहा स्पेक्ट्रम , कर जाकर पड़ताल ।
कर जाकर पड़ताल, शीघ्र सम्बन्ध बनाओ ,
जैसे भी हो सके ,और स्पेक्ट्रम लाओ ।
भारत की यह रीति ,जेल से ठेके चलते ,
और करोगे देर ,रहोगे हाथ को मलते .१.
२ . कनिमोई जेल में
करुणा बेटी से कहें , रहा नहीं कुछ काम.
राजा जी तो धन्य हैं, दुनिया में छाया नाम .
दुनिया में छाया नाम ,स्वयं है जेल में बैठा ,
रहा नहीं अब पूछ , है रहता ऐंठा - ऐंठा .
चलता होगा उद्योग,कनिमोई जेल में जाओ ,
जितना भी हो सके , कमीशन ले कर आओ .२.

अंधेर नगरी चौपट राजा ,टके सेर भाजी टके सेर खाजा.
वत्स यहाँ तू कभी न रहना , मुफ्त माल का लालच कर न .
वरना कभी भी फंस जायेगा ,सूली पर लटका जायेगा
गुरूजी, बात कुछ अच्छी बोलो,अशुभ-अशुभ शब्द मत घोलो,
कितना अच्छा देश है देखो , टके सेर में काजू ले लो ।
मैं तो रहूँगा इस धरती पर , फल - मेवे खाऊँ मैं जी भर ।
गुरु की बात चेला न माने , रहने लगे शहर अनजाने ,
एक दिवस चोर पकड़ाया, उसके लिए फंदा बनवाया ।
फंदा बड़ा बना कुछ ऐसा , गर्दन हो भैसे के जैसा ।
चोर की गर्दन सुकड़ी-पतली ,निकल गई झट बिना ही अकड़ी ।
राजा ने देखा जब फंदा , बोले लाओ मोटा बंदा ।
मोटी-ताजी गर्दन हो जिसकी , फंदे में फंस जाये उसकी ।
उसको ही फांसी लटकाओ , शीघ्र मेरा आदेश बजाओ ।
मोटा ताजा चेला जब पाया , पकड़ उसे ऊपर लटकाया ।
बच्चों कभी न लालच करना ,नेकी के रास्ते पर चलना ।
यह कथा अगर पढ़ते अम्बानी ,इतनी न करते नादानी ।
पाँच बड़े अधिकारी लटके ,प्राण हैं उनके ऊपर अटके ।
क्यों है ऐसा देश बनाया , लूट का है व्यापार चलाया ।
खुद करता जा खूब घोटाला, रक्षा करे अब ऊपर वाला । 3 ।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

अन्ना जी के साथ

अन्ना जी के साथ

भ्रष्टाचारी अर्थ शास्त्रियो ने , देश किया बर्बाद ,
देश बेच कर हो रहे , मंत्री-अफसर आबाद .
मंत्री-अफसर आबाद , नाम जनता का लेते ,
लूटें नोट पे नोट , विदेशों को है देते .
बाबा अन्ना हैं अभी , देश के पहरेदार ,
जनता मिल-जुल एक हो, गद्दारों से होशियार .१.

रंग बदलती जा रही , सोनिया की सरकार
सोनिया जी खामोश थीं ,होते गए भ्रष्टाचार.
होते गए भ्रष्टाचार , राहुल जी कुछ नहीं बोले,
मनमोहन हैं व्यस्त , कभी न आँखें खोलें .
अन्ना जी को आज, जो नेता नहीं स्वीकारें ,
वे भ्रष्टों के एजेंट, उन्हें पहचानो प्यारे .२.

भ्रष्टाचारी हैं कर रहे , लोगों पर आघात,
देश की जनता आ गयी , अन्ना जी के साथ .
अन्ना जी के साथ ,सड़क पर हम सब आयें ,
दिखा दें अपनी शक्ति , लोक धुन उन्हें सुनाएँ,
फूल गया है बहुत , भ्रष्टाचारी गुब्बारा ,
उसमें कर दो इक छेद, यही है अंतिम चारा .३.

डा.ए. डी. खत्री ,भोपाल