दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है
दक्ष मेरा फूलों सा कोमल
तितली सी चंचलता पाई
फुदक-फुदक कर इत -उत डोले
जैसे सोन
चिरैया है
दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है
सबका कृष्णा कन्हैया है.
बातें प्यारी-प्यारी करता
जो सुन ले उसका दिल हरता
मुस्काकर बरबस मन मोहे
यह तो भूल भुलैया है
दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है, सबका कृष्ण
......
मन में दुःख भरा हो कोई
तन कष्टों ने घेरा हो
प्यारी नजर पड़े नटवर की
सबसे मुक्त करैया है
दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है , सबका कृष्ण
....
छोटे-छोटे पैर दक्ष के
गोप- गोपियों के संग खेले
इसके आगे, उसके पीछे
कहता दीदी-भैया है
दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है , सबका कृष्ण
....
दादा-दादी का मन मोहे
पिता को आनंद देता जाए
अपने नटखट कामों से
सबका नाच नचैया है
दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है , सबका कृष्ण
....
दक्ष जहां हो धूम मचाए
उछले-कूदे , हँसे - हँसाए
सदा हँसे यह इसी तरह से
माँ ले रही बलिया है
दक्ष तो कृष्णा कन्हैया है , सबका कृष्ण
....
आशीर्वचन
चाँद-सितारों से है प्यारा
नन्हा-मुन्ना दक्ष हमारा
मात-पिता की आँख का तारा
सुन्दर,नटखट सबसे न्यारा .
ईश्वर कि हो कृपा दक्ष पर
बुद्धि,विवेक,मेधा विकसित हो
शरीर हो पुष्ट,सबल,सुन्दर
सद्गुण की न कोई कमी हो .
दो वर्षों का दक्ष हुआ है
बहुत बधाई जन्म दिवस कि
नित सबको आनंद यह देवे
जैसे हो फुहार पावस की .
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें