सोमवार, 7 जनवरी 2013

बंगलादेश में राष्ट्रपति शासन

                                      बंगलादेश में राष्ट्रपति शासन   (1975 )
  बंगलादेश में राष्ट्रपति शासन प्रो डी खत्री द्वारा फरवरी १९७५ में पत्र 'दिनमान ' में प्रकाशन के लिए भेजा गया था जो नहीं छप सका .रद्दी कागजों में यह पुनः मिला इस पुराने पत्र को पाठकों के समक्ष ३६ वर्ष पश्चात प्रस्तुत करने का उद्देश्य है , इसकी सत्य भविष्य वाणी जो बंगलादेश की राजनीति दिशा के लिए की गई थी और जिसे कोई महत्त्व नहीं दिया गया था बंगलादेश की आजादी के बाद मुजीबुर्रहमान पहले प्रधान मंत्री बने .उन्होंने सभी विपक्षी दलों को प्रतिबंधित कर दिया था तथा एक नया संविधान बनाकर वे बंगलादेश के राष्ट्रपति बन गए तथा सारी शक्तियां अपने हाथ में समेट लीं भारत की प्रधान मंत्री इंदिरागांधी समेट अनेक राष्ट्राध्यक्षों ने इसे बंगला देश की दूसरी आजादी कहा तथा उन्हें बधाइयाँ दी जाने लगीं डा खत्री ने इस पत्र के माध्यम से चेतावनी देनी चाही कि उनके साथी उनकी हत्या कर सकते हैं तथा इसका अंत मिलिट्री शासन में होगा और छः माह बाद वही हुआ पत्र कि याह भविष्यवाणी भी सही हुई कि रूस में कमुनिस्ट शासन का अंत उनके आतंरिक विस्फोट से होगा परंतु यह अनुमान गलत निकला कि वहां पर कम्युनिस्टों का शासन दो -ढाई सौ साल बाद नष्ट होगा , वह ७६-७७ वर्ष संसदीय ही समाप्त हो गया
       संसदीय प्रणाली से अध्यक्षीय प्रणाली में परिवर्तन करना क्रांति का पर्याय नहीं हो सकताइस प्रकार का परिवर्तन तानाशाही का प्रतीक भी नहीं है परन्तु एक ही द का शासन होना तानाशाही हैइस पद्धति में एक ही व्यक्ति जो द का अध्यक्ष होता है राज्य की सभी शक्तियों ( व्यवस्थापिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका ) का नियंत्रण करता हैबंगलादेश की नवीन पद्धति के अनुसार सरकारी कर्मचारी भी सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के सदस्य हो सकते हैं .यह इस तथ्य का पर्याय मात्रा है कि दल के सदस्य ही सरकारी कर्मचारी हो सकते हैंविधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का एकीकरण होने से राष्ट्र के अध्यक्ष को असीम अधिकार प्राप्त हो जाते हैंयदि हम उसे निरंकुश शासक कहें तो अधिक उपयुक्त होगा.अधिकार सुखद परिणाम के द्योतक नहीं हैं अधिकार शब्द कर्तव्य का ही रूपांतर है अधिकारों कि व्यापकता का अर्थ है कर्तव्यों कि व्यापकताअतः निरंकुश शासक के कर्तव्य भी असीम हो जाते हैं .व्यक्ति सीमित होता है ,वह असीमित कर्तव्यों का पालन कभी नहीं कर सकेगा
      बंगलादेश कि वर्तमान शासन पद्धति में मुजीब का प्रभाव इतना अधिक है कि देश का कोई भी व्यक्ति उनकी आलोचना नहीं कर सकेगाबंगबंधु सर्व व्यापी नहीं हैं उन्हें उस समूह के व्यक्तियों का विश्वास करना होगा जो उन्हें सदैव घेरे रहेंगे .देश कि वर्तमान समस्याओं को देखते हुए स्वार्थी लोगों का एक नया वर्ग जन्म लेगा कुछ दिनों ताक ये लोग अपने कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं परन्तु शीघ्र ही वे अपने अधिकारों द्वारा दलित वर्ग का शोषण प्रारंभ कर देंगेनिरंकुश शासन में षड्यंत्रों की सम्भावना भी बढ़ जाती हैयह कार्य उन लोगों के लिए अधिक सुगम होता है जो शासक दल के निकट रहते हैं .कालांतर में ये लोग षड्यंत्रों में रूचि लेने लगेंगे , शासन मुजीब का हो या उनके उत्तराधिकारियों काइन लोगों की महत्वाकांक्षा अधिक अधिकार पाने की ओर प्रवृत होगी की कर्तव्यों का पालन करने मेंइससे जो राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न होगी उसका अंत सैनिक तानाशाही में होगा
       एक दलीय शासन पद्धति साम्यवादी देशों में फलीभूत हो रही हैनिश्चित रूप से यह पद्धति संक्रमण कल में उपयुक्त है , स्थायी भी अपेक्षा कृत अधिक हैइसका मुख्य आधार दल की दार्शनिक विचारधारा हैदल का सदस्य केवल उस व्यक्ति को बनाया जाता है जो कार्य एवं विचारों द्वारा साम्यवाद में आस्था प्रदर्शित करता हैपरन्तु ये विचार रूढ़ीवादिता को जन्म देंगे .उदहारण स्वरूप वैदिक एवं उसके पश्चात् बौद्ध धर्म का विकास चरम सीमा ताक हुआ था .समय के साथ ही लोग धर्म को कर्तव्य मान कर पंथ मानने लगे और कुछ विशेष क्रियाओं के करने में ही उनके कर्तव्य की इतिश्री होने लगीवे रूढ़ी वादी हो गए और उनका पतन हो गयाअतः साम्यवाद का अंत भी अराजकता में , जैसा कि कार्ल मार्क्स ने कहा है , होकर सैनिक तानाशाही में होगा परन्तु इसमें पर्याप्त समय लगेगा इसके विपरीत बंगलादेश की राजनीति में द का पतन कभी भी हो सकता है
   'बंगला देश अब्सर्वर ' ने लिखा है , बंगबंधु चाहे जिस भी रूप में देश का नेतृत्व करें , वे बंग बन्धु ही हैं , वह राष्ट्र पिता हैं ',मैं इससे सहमत नहीं हूँ .एक पिता अपने पुत्र को जन्म देने के बाद उसका उपयोग अपनी इच्छा से नहीं कर सकतायहाँ एक व्यक्ति की इच्छा का प्रश्न हैदेश की सीमा में बहुत लोग रहते हैं जिन्होंने देश के लिए त्याग किया हैउन सब को किसी एक व्यक्ति की इच्छा से चलने के लिए बाध्य करना मानवता की हत्या होगी फिर वह इच्छा चाहे राष्ट्र-पिता की ही होयदि श्री मुजीब इस पद्धति को संक्रमण काल के रूप में एक निश्चित अवधि तक लागू करके पुनः प्रजातंत्र की स्थापना करते हैं तो निश्चय ही वे एक राष्ट्र के जनक हैं , श्रद्धा के पात्र हैं .इतिहास उनकी भूरी भूरी प्रशंसा करेगायदि यह स्थायित्व ग्रहण करती है तो यह क्रांति नहीं भ्रान्ति होगी और इतिहास इसके परिणामों का दोष भी मुजीब के सिर पर मढ़ देगा

सड़क और शिक्षा

सड़क

नेता-अफसर कर रहे ,जम कर भ्रष्टाचार ,
ऊपर से स्थिर दिखें,अन्दर बढ़ता भार .
अन्दर बढ़ता भार,सड़क पर जब वे जाते ,
मिटटी-गिट्टी,अत्थर-पत्थर,सब उड़ जाते.
लिंक रोड भोपाल खूब मोटी बनवाएँ ,
दौड़ें जितने भ्रष्ट, सड़क पर आंच न आए .१.

शिक्षा

छोटे- मोटे क्लर्क हुए , शिक्षा के खेवन हार ,
शिक्षक-प्राचार्य देखते , दूसरे कारोबार .
दूसरे कारोबार , कराते अफसर सारे,
पढाई- लिखाई से दूर , हुए शिक्षक बेचारे .
युद्ध पर जाती फ़ौज, परीक्षा ऐसे होती,
शिक्षा का उद्योग, उगलता हीरे-मोती.२.

विदेशों में काला धन


                                       काले धन को सरकारों का संरक्षण

विश्व भर में चोर ,लुटेरे , डाकू , डान , स्मगलर ,बाहुबली , राजनीति में घुसकर , या राजनीतिज्ञों से दोस्ती करके अपने देश की संपदा , धन -दौलत दूसरे देशों के बैंकों में जमा करते रहते हैं और वहां की सरकारें इस डकैती को पूरा-पूरा संरक्षण देती हैंउच्चतम न्यायालय द्वारा भारत सरकार से यह पूछने पर कि गरीबों कि संपत्ति लूटने वालों के नाम उजागर क्यों नहीं कर रहें हैं , प्रधान मंत्री डा मनमोहन सिंह का यह कथन कि नाम उजागर करने से देश की प्रतिष्ठा गिर जायगी और विश्व में लोग हमारा विश्वास नहीं करेंगे , आश्चर्यजनक हैकौन हमारा विश्वास नहीं करेंगे ? इन नेताओं के नाम विदेशी बैंकों में कमीशन जमा करने वाले , देश के लोगों की गाढ़ी कमाई को लूटने में मदद करने वाले लोग हमारा विश्वास नहीं करेंगेसरकार की पहली चिंता उन्हें संरक्षण देना हैवे रहेंगे , वे खुश रहेंगे तो इन लुटेरों के नाम भविष्य में भी दौलत जमा होती रहेगीसत्तारूढ़ दल अपने या अपने सहयोगी सदस्य का नाम खोलेंगे तो सरकार अगले दिन गिर जायगीएक का नाम भी बताएंगे तो पूरी लिस्ट खोलनी पड़ेगीन्यायालय को सरकार से इतने साहस की आशा नहीं करनी चाहिए
देश में मंहगाई और भ्रष्टाचार से गरीब -अमीर सभी त्रस्त हैंदेश का बहुत सारा धन लूटने के कारण ,आज करोड़ों लोग गरीबी रेखा से नीचे जीने को मजबूर हैंआज कोई मानवाधिकार वादी गरीबों के पक्ष में अपना मुंह नहीं खोल रहा है .लेकिन यदि इनमें से कभी कोई धोखे से पकड़ में गया , उसे दो- चार दिन जेल में रहना पड़ा ,तो ये आसमान से बरस पड़ेंगे और उन्हें बचाने के लिए हा-हा कार मचा देंगेडाकू ,लुटेरे राजनीतिज्ञ - अफसर बड़े पक्के दिल से देश को चूसते रहते हैं , पहलवान बने रहते हैंजिस दिन उन्हें पकड़ लिया जाय ,उन्हें दिल का दौरा पड़ जाता है कि अब और कमाई कैसे करेंगे .उनके लिए सारी चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाती है और बड़े जतन से संभा -संभाल कर रखा जाता हैअधिकांश स्थितियों में न्याय व्यवस्था उनके साथ होती हैइसलिए भ्रष्टाचार होते रहे हैं , बढ़ते जा रहे हैं और बढ़ते जायेंगे , कोई कितना सर पटक ले

सोमवार, 31 दिसंबर 2012

नव वर्ष की शुभकामनाएं , चुनौती , शांति


             नव वर्ष की शुभकामनाएं
नया वर्ष हो नया सबेरा , खुशियाँ लेकर आये , 
सबमें उमंग हो बढ़ने की , हम आगे बढ़ते जाएँ 
नव तरंग हो  जीवन में नव चेतना के अंकुर हों 
आनंद भरी  राहें हों ,सबके कल्याण के सुर हों ।

                          चुनौती 
दौलत, दौलत, हाय दौलत,दौलत का कारोबार किया ,
धर्म-कर्म कुछ नहीं होता , जैसा चाहा व्यवहार किया।
हिंसक पशु में भी नैतिकता,  उदर पूर्ती सीमा होती,
हैवान हैं क्रूर हुआ करते,अति की सीमा है नहीं होती।
मनमाने दुर्व्यव्हार करें,जी भरके अत्याचार करें ,
है पेट नहीं उनका भरता, दुष्कर्म करें और वार करें।
हैवान पर करुणा  बरसाई,अन्यायों का विस्तार हुआ,
'जो होता है ,होने दो', के भाव का खूब प्रचार हुआ।
चुप बैठकर मत अन्याय सहो,अपनी ताकत को पहचानो ,
चुनौती है, तो स्वीकार करो, ऐ परिवर्तन के दीवानों।।

                   शांति 
बुरा नहीं हम देखते हैं, बुरा नहीं हम सुनते हैं,
बुरा नहीं हम कहते हैं ,इसीलिए चुप रहते हैं।
मंहगाई भ्रष्टाचर बढे या काला व्यापार बढ़े,
अन्दर - बाहर आतंक बढे,हम शान्ति बनाए रखते हैं 
दुष्कर्म और अत्याचार बढ़ें, नौकर न कोई काम करें   
प्रकरण उलझें न्यायालय में,हम कोई चिंता नहीं करते हैं.

शनिवार, 29 दिसंबर 2012

लोकतंत्र का विचार concept of loktantr

                                                  लोकतंत्र  का विचार

   भारत में अपराध तो होते हैं परन्तु अपराधी नहीं होते . यदि अपराधी होते ( पकडे जाते )तो ढाई - तीन करोड़ मुकदमें न्यायालयों में लंबित नहीं होते . इस सामंतवादी व्यवस्था में कानून में सुधार की आशा नहीं की जानी चाहिए . भारत में मुकदमें अपराधियों को बचाने के लिए होते हैं . भारत में नॅशनल ला कालेज खुले हैं , जहां से निकलने वाले कानूनविद बड़ी-बड़ी कंपनियों को क़ानून से बचाने के लिए नियुक्त हो रहे हैं . देश की क़ानून व्यवस्था की किसे चिंता है .
          दिल्ली में छात्रा का  अपहरण करके बुरी तरह घायल किया गया और  रेप किया गया  . 13 दिन जीवन से संघर्ष करने के बाद वह हार गई . युवा वर्ग ने इस अवसर पर जो आक्रोश प्रगट किया है , वह अद्भुत है . परन्तु इस प्रकार के आन्दोलन कब तक किये जा सकते हैं . व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें अपराध की संभावनाएं कम से कम हों . जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह छात्रों के नियंत्रण में नहीं आएगी , अपराध नहीं रोके जा सकेंगे .
          हमें एक ऐसी सामाजिक, राजनीतिक व्यवस्था निर्मित करनी है जिसमें  प्राध्यापकों एवं बुद्धिजीवियों के ज्ञान , युवा छात्रों की शक्ति और सेवा निवृत्त कर्मचारियों - अधिकारीयों  के  अनुभव एवं समय का भरपूर उपयोग किया जा सके . तभी वास्तविक लोकतंत्र अर्थात जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए शासन स्थापित होगा जिसमें कोई दूसरे का शोषण नहीं करेगा, सबको लाभ होगा और लोग संतुष्ट होंगे तो अपराध कम से कम होंगे .



                                                 concept of loktantr
   In Indian courts more than 25 million cases are pending. it shows that in India crimes are recurring but  no culprit exists. courts take several years even for Petty  cases . delay in justice is justice denied . when there is no justice , criminals dominate and this is happening in India . Severe punishment may control the crime to some limit , but if a system with chances of minimum crimes  is established , it would be far better . In that case the maximum energy of the society & state would be utilized in constructive work . Such a system can be developed only when  the whole system does not come under the influence of student , 
         The enthusiasm , energy and the anger shown by the youths  in Delhi & through out India against  the rape case, has created a fear among the politicians & they say that they also want to change the punishment process . But it is not possible to change the judicial system in India. they may decide one rape case in short time  but what for the other  thousands of rape cases pending in courts  ? The question is how long & how many times the youth may   come on roads ?
  We need to develop such a system in which intelligence of the intellectuals . energy of the students & experiences of retired persons may be utilized in the interest of the nation . Only then Loktantr i.e. is the rule of people , the rule by the people & rule for the people will be established .



शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

महिला अपराध रोकने के उपाय

                                           महिला अपराध रोकने के उपाय 

      महिलाओं से दुष्कर्म आदिकाल से होते आ रहे हैं . कुछ समय पूर्व तक महिलाएं इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखती थीं .अतः अधिकांश प्रकरणों में वे और उनके सम्बन्धी चुप रह जाते थे . विज्ञान की प्रगति एवं शिक्षा के प्रचार- प्रसार से महिलाओं के स्तर में बहुत उन्नति हुई है और अब दुष्कर्म को छुपाने की अपेक्षा अपराधी को सजा दिलाने के लिए वे आगे बढ़ी हैं . इस अपराध में सबसे कष्टप्रद स्थिति उस समय उत्पन्न होती है जब महिलाओं से कुरेद - कुरेद कर घटना के बारे में पूछा जाता है और अनेक वर्षों तक मुकदमें चलते रहते हैं तथा अपराधी अपराध करते जाते हैं .दिल्ली रेप केस में युवा पीढ़ी ने  जिस प्रकार अपना प्रबल रोष व्यक्त किया है, उससे भयभीत होकर सरकार ने अपना पिंड छुड़ाने के लिए आनन्- फानन में वर्मा आयोग का गठन कर दिया है .
          कायदा तो यह कहता है की पहले आयोग के सदस्य इस पर अपने विचार रखते . उन तथ्यों को सामने लाते जिनसे मुकदमों के निर्णय नहीं हो पाते हैं और अपने सुझाव भी देते . उस पर विस्तृत चर्चा होती , लोग अपने नए विचार भी रखते और एक संतोषप्रद कानून बनाया जाता . अब लोग क्या विचार देंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा और पुरानी  परम्परा के अनुसार पुनः ऐसा क़ानून बन सकता है जिससे लाभ कम हानि अधिक हो . आज अनेक लोग रेप के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं परन्तु इनसे सभी महिलाओं का कितना भला होगा कहना कठिन है जबकि उनका दुरुप करके काल गर्ल , और बाजारू औरतें कितनों को ब्लैक मेल कर देंगी कहना कठिन है जैसा दहेज़ कानूनों के द्वारा किया जा रहा है।
   भारतीय शिक्षा  से  नैतिकता पूरी तरह समाप्त कर दी गई है . अनैतिकता होगी तो सभी प्रकार के अपराध भी होंगे . अतः अब कठोर दंड व्यवस्था से दुष्टों को वैसे ही नियंत्रित करने का प्रयास किया जाय जैसे जानवरों को किया जाता है क्योंकि मनुष्य में से नैतिकता निकाल दें तो पीछे जानवर ही बचता है .भारत के गृहमंत्री शिंदे जी ने इसे रेयर अमंग रेयरेस्ट कह कर शीघ्र सुनवाई की बात की  है .  रेयर अमंग रेयरेस्ट की परिभाषा कौन तय करेगा ? कानून स्पष्ट सिद्धान्तों के आधार पर बनाए जाने चाहिए ताकि निर्णय देने में दुविधा न हो . रेप के इन प्रकरणों में यथा शीघ्र फांसी की सजा होनी चाहिए :
(1)10 वर्ष से छोटे बच्चे का , निकट सम्बन्धी द्वारा अवयस्क का  रेप, असहाय, लाचार, घायल , मानसिक रूप से विकृत लोगों का रेप तथा रेप के बाद हत्या करने वाले अपराधी . 
 (2)  इन प्रकरणों में आजीवन कारावास होना चाहिए :डरा- धमकाकर अवयस्क का रेप, शिक्षक या अभिभावक  द्वारा रेप ( यदि सहमति  से किया गया हो तो 7 से 10 वर्ष की कैद ), सामूहिक बलात्कार ( सभी को सजा हो ), कंडिका (1) में वर्णित रेप के प्रयास .
(3)अन्य  प्रकरणों में 7 वर्ष .अपराधी यदि अवयस्क हों तो जज उनके हाव-भाव और चाल- चलन के आधार पर समुचित निर्णय लें। 
   इन अपराधियों की संपत्ति अथवा इनके हिस्से की संपत्ति भी कुर्क करके  पीड़ित को मानहानि  की क्षतिपूर्ति के रूप में दी  जानी  चाहिए . यदि कुर्क करने से प्राप्त राशि अधिक हो तो उसका पर्याप्त भाग राजसात करना चाहिए . 
    एक सामान्य सिद्धांत यह होना चाहिए कि रेप के साथ और कौन सा अपराध किया गया है।  दंड संहिता में उस अपराध की जो सजा निर्धारित हो , रेप की सजा में उसे जोड़कर कुल सजा दी जानी  चाहिए। प्रत्येक सजा के साथ भारी अर्थ दंड अवश्य लगाना  चाहिए .जैसे दिल्ली रेप कांड  में  युवती को क्रूरता से घायल किया, राक्षसी प्रवृत्ति से रेप किया और राजधानी की सड़कों पर देश की क़ानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए किया की जिससे जो बने कर ले . उनकी तो पूरी संपत्ति राजसात करके फांसी ही होनी चाहिए . 
 अब काला पानी तथा कोल्हू चलाने जैसी सजाएं तो होती नहीं हैं . किसी भी प्रकार के कठोर अपराध करने वाले लोग यदि प्रायश्चित  करते हैं , अपना अपराध स्वीकार कर लेते हैं , तो उन्हें सेना की  देख-रेख में सीमान्त या वन क्षेत्रों में चलने वाले निर्माण कार्यों में मजदूर के रूप में भेज देना चाहिए . मजदूरी का एक भाग उनके भोजन पर तथा शेष उनके खाते में जमा कर  देना चाहिए .
 यदि कानून का यह सिद्धांत रहेगा की 99 अपराधी भले ही छूट  जाएँ , एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए और 99 अभियुक्त छूटते रहेंगे तो वर्तमान के अनुसार अपराध तो होंगे और बढ़ते भी  जायेंगे परन्तु अपराधी नहीं मिलेंगे।न्याय में करुणा दिखाने पर  अन्याय और अपराध शेष रहता है . 
           भोपाल में एक बहुचर्चित रेप प्रकरण दर्ज हुआ था जिसमें एक निर्दोष व्यक्ति को अनेक दिन जेल में रख कर प्रताड़ित किया गया . बाद में ज्ञात हुआ की रेप की पूरी कहानी एक षड्यंत्र थी जिसमें गुजरात के एक व्यापारी ने किसी को फंसाने के लिए 20 हजार रूपये किराये में एक लड़की भेजी थी . ऐसे प्रकरणों में अन्य अपराधियों के पूर्व ऐसी लड़की को कठोर अर्थ दंड के साथ सश्रम जेल की सजा देनी चाहिए . रायपुर मेंछापे में एक लड़की  कई लड़कों के साथ पकड़ी गई . वह कहती है कि वह बेचारी गरीब है , मुंबई से 10 दिनों के लिए 50हजार रूपये में सेक्स करने आई है . उच्चतम न्यायालय  भी यह कह चूका है कि जो स्वेच्छा से सेक्स का आनद ले रही है उनके निपटारा किन कानूनों से किया जाय . जब सरकारी स्तर  पर सेक्स को बढ़ावा दिया जा रहा है , राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गर्व से कहती हैं कि सेक्सी कही जाने पर महिलाएं खुश हों , युवा लड़कियों को बार में जाने को पूरा संरक्षण दिया जा रहा है तो सेक्स कार्यों के लाइसेंस देने में शर्म क्यों आ रही है . इससे जहां एक ओर मनचलों का ध्यान सामान्य लड़कियों से हट जायगा , राष्ट्र की आय भी बढ़ जायेगी जिसकी  सरकार को भारी आवश्यकता है। नैतिकता के अभाव में महिला अत्याचार रोकने का यह मार्ग भी हो सकता है .
 डा . ए . डी .खत्री , भोपाल  










बुधवार, 26 दिसंबर 2012

सरकारी राजनीति , पुलिसिया राज , न्याय

          सरकारी राजनीति

कानून व्यवस्था है नहीं, अपराध होंय सरे आम।
तिकड़म उनका देखिये, जनता के  लगते नाम।।
जनता के लगते नाम, कि वे अपराध हैं करते।
उनके हिंसक कार्यों से, पुलिस जवान हैं मरते।।
राजनीति क्या होती है, भारत की सरकार दिखाए
पीड़ित-घायल जनता से भी लाभ कमाना चाहे।।    
              

         पुलिसिया राज

रामदेव हो बंद जेल में, उनको सबक सिखाएं।
पहले हमला किया रात में, अब  -डंडे चलवाएं।।
अब  डंडे चलवाएं, युवक - युवती को मारें।
करें जेल में बंद जैसे, कोई   अपराधी न्यारे।।
बोले  झूठ पे झूठ, उसे सच  कहते   जाएं ।
हुए नेता निर्लज्ज, पुलिसिया राज चलाएं।।

            न्याय 

युवकों में उत्साह था, अपराधी बच  न पायं।
शांतिपूर्ण एकत्र हो, नारे लगवाते जायं।।
नारे लगवाते जायं, दुष्टों  को सजा सुनाओ।
पीड़ित - घायल बाला  को,शीघ्र न्याय दिलाओ।।
न्याय के नाम जमा किया, हिंसा का व्यापार।
न्यायालय अभी भी मौन हैं,कौन है खेवनहार।।